719, नई बस्ती, कटरा नील, दिल्ली में स्थित मंदिर माँ भवना वाली माँ दिल्ली वाली मैया जी के बचपन से लेकर लगभग 15 वर्षों तक की समर्पित प्रार्थनाओं का परिणाम है। वर्ष 1972 में 719 के भूतल को एक मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया। मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, धार्मिक समारोहों का आयोजन, नवरात्रि और भंडारे उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य थे।
मंदिर माँ भवना वाली माँ दिल्ली परिवर्तन और मुक्ति की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो भ्रम और अहंकार के मोह को नष्ट करने की क्षमता को दर्शाती हैं, जो व्यक्ति के गहरे भय का सामना करके और ईश्वर के सामने आत्मसमर्पण करके आध्यात्मिक ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती हैं, जो अनिवार्य रूप से भौतिक दुनिया की सीमाओं से परे सच्चे आत्म की प्राप्ति की ओर ले जाती हैं; उनका भयंकर रूप इस आंतरिक परिवर्तन को प्राप्त करने के लिए आवश्यक विनाश का प्रतीक है।
चैत्र और वैश्ख नवरात्रि के बाद माँ दुर्गा का भंडारा।
रामायण का सुंदर कांड पाठ
कृष्ण जन्माष्टमी
राधा अष्टमी
लोहड़ी, होली, तीजी, दिवाली
वार्षिक जागरण
हर महीने चंद्रोदय की अष्टमी को नियमित रूप से भजन-कीर्तन किया जाता है।
शीतकालीन मौसम में जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र वितरित करना।
गरीब परिवारों की लड़कियों के विवाह का सारा खर्च वहन करना।
साल में कम से कम दो लड़कियों का विवाह।
गरीबों को भोजन वितरित करना।
जरूरतमंदों के इलाज के लिए दवाओं का खर्च वहन करना।
सुबह 8:00 बजे
शाम 8:00 बजे
मंदिर माँ भावना वाली माँ दिल्ली वाली
धार्मिक कार्यक्रम
1. माँ दुर्गा अष्टमी और माँ अन्नपूर्णा का भंडारा – प्रत्येक माह
2.नवरात्रि और माँ अन्नपूर्णा का भंडारा – हर छह महीने में (साल में दो बार)
3.सलाणा जागरण भजन कीर्तन एवं माँ अन्नपूर्णा का भंडारा – वर्ष में एक बार – जनवरी का पहला या दूसरा शनिवार
3.सुन्दर काण्ड का पाठ – वर्ष में तीन बार
4.श्री हनुमान जयंती सवा मनि भोग – वर्ष में एक बार
5.श्री कृष्ण जन्मास्टमी – वर्ष में एक बार
6.भोले बाबा का अभिषेक – वर्ष में दो बार
7.महाशिवरात्री – वर्ष में एक बार
मैया बाबा की असीम कृपा और इच्छा अनुरूप हर की पौरी हरिद्वार जा कर भगवती गंगे माँ में डुबकियाँ लगाने का निछित किया है।
दिनांक: 22 अप्रैल 2025
मंदिर से बस के चलने का समय: सुबह 6 बजे।
आप सब से निवेदन है कि मैया जी के मंदिर में सुबह 5:30 बजे पहुंचें श्री बाबा लालू जी जसराय जी की अरदास करने के लिए।
जो बच्चे हरिद्वार जाने के लिए इच्छुक हैं वो अपने आधार कार्ड की कॉपी मुझे व्हाट्सएप कर दें।
सामाजिक सेवा (Social Service) निस्वार्थ भाव से समाज के कल्याण, उत्थान और जरूरतमंदों की सहायता के लिए किया गया कोई भी कार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य वंचितों को सशक्त बनाना, समानता लाना और एक बेहतर, स्वस्थ एवं समावेशी समाज का निर्माण करना है।
इसे विभिन्न मुख्य श्रेणियों में समझा जा सकता है।
1. सामाजिक सेवाओं के प्रकार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा: गरीबों को मुफ्त इलाज, दवाइयाँ, रक्तदान शिविर, और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता। शिक्षा और कौशल विकास: बच्चों को मुफ्त पढ़ाना, साक्षरता अभियान, और व्यावसायिक प्रशिक्षण।
महिला एवं बाल विकास: महिलाओं को सशक्त बनाना, बाल अधिकारों की रक्षा, और अनाथालयों या वृद्धाश्रमों में सहायता। खाद्य और आवास सुरक्षा: बेघरों को भोजन, रैन बसेरा, और आपदा के समय राहत सामग्री पहुँचाना।
2. सामाजिक सेवा का महत्व यह लोगों के बीच प्रेम और सहयोग की भावना पैदा करती है। यह समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को मुख्य धारा में लाने में मदद करती है। यह अपराध दर को कम करने और एक मजबूत तथा सुरक्षित समुदाय बनाने में योगदान देती है।
3. सामाजिक सेवा बनाम सामाजिक कार्य समाज सेवा (Social Service): यह कोई भी स्वैच्छिक गतिविधि (जैसे- दान, सफाई अभियान, जरूरतमंदों की मदद) हो सकती है जो कोई भी व्यक्ति बिना किसी विशेष डिग्री के कर सकता है।
सामाजिक कार्य (Social Work): यह एक पेशेवर, अकादमिक और सुनियोजित कार्य है।
माता-पिता देवतुल्य (ईश्वर के समान)
माता-पिता को ईश्वर के समान (देवतुल्य) और पूजनीय माना गया है। वे हमारे जीवन के प्रथम गुरु और सबसे बड़े शुभचिंतक होते हैं। माता-पिता का सम्मान और सेवा करने के जीवन में सफलता मिलती है। रोज सुबह उठकर उनको नमन करने से दिन की शुरुआत सकारात्मक होती है।
उनसे बात करें और उनकी बातें सुनें, उन्हें अकेलापन महसूस न होने दें। उनके साथ समय बिताएं और उनके द्वारा किए गए बलिदानों और पालन-पोषण के लिए हमेशा उनके प्रति आभारी रहें।
719, नई बस्ती, कटरा नील, दिल्ली में स्थित मंदिर माँ भवना वाली माँ दिल्ली वाली मैया जी के बचपन से लेकर लगभग 15 वर्षों तक की समर्पित प्रार्थनाओं का परिणाम है। वर्ष 1972 में 719 के भूतल को एक मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया। मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, धार्मिक समारोहों का आयोजन, नवरात्रि और भंडारे उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य थे।
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